Welcome to राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद

भूखे के चेहरे की मुस्कान ही हमारी सबसे बड़ी पूजा

राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद निभा रहा मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व का अनूठा संकल्प


"सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है, अन्नदान सबसे बड़ा पुण्य है और मानवता ही सबसे बड़ी पहचान है।"

प्रातःकाल जब मनुष्य प्रभु का स्मरण, पूजा और प्रार्थना करता है, तब उसके बाद यदि कोई सबसे बड़ा धर्म है तो वह है किसी भूखे को भोजन कराना। भारतीय संस्कृति में अन्नदान को महादान कहा गया है, क्योंकि भोजन केवल पेट ही नहीं भरता, बल्कि किसी जरूरतमंद के जीवन में आशा, सम्मान और विश्वास भी जगाता है। जिस समाज में सक्षम लोग अपने सामर्थ्य का कुछ अंश मानव सेवा के लिए समर्पित करते हैं, वह समाज सदैव समृद्ध, संवेदनशील और संस्कारित बनता है।

इसी विचारधारा को अपने जीवन का उद्देश्य बनाकर राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद पिछले दो वर्षों से निरंतर मानव सेवा का ऐसा अभियान चला रहा है, जो आज हजारों लोगों के लिए आशा का केंद्र बन चुका है। यह संस्था बिना किसी जाति, धर्म, भाषा, वर्ग या क्षेत्र के भेदभाव के प्रतिदिन जरूरतमंद लोगों तक गरम-गरम नाश्ता और अन्नदान पहुंचा रही है। संस्था का मानना है कि सेवा का सबसे बड़ा स्वरूप वह है, जिसमें किसी भूखे को सम्मानपूर्वक भोजन कराया जाए और उसके चेहरे पर संतोष की मुस्कान लाई जाए।

राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद की स्थापना के पीछे चार समर्पित समाजसेवियों का संकल्प, त्याग और अथक परिश्रम रहा है। सतीश गुप्ता, जगत नारायण अग्रवाल, राम प्रकाश अग्रवाल (गोयल पटवारी) और महेश अग्रवाल ने मिलकर इस सेवा अभियान की नींव रखी। इन चारों का उद्देश्य केवल भोजन वितरण करना नहीं था, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और मानवता की ऐसी भावना विकसित करना था, जिससे अधिक से अधिक लोग इस पुनीत कार्य से जुड़ें। आज उनका यह संकल्प एक विशाल सेवा परिवार का रूप ले चुका है।

राधे-राधे ग्रुप के संयोजक सतीश गुप्ता ने बताया कि संस्था के नाम "राधे-राधे" की प्रेरणा उन्हें भागवताचार्य पूज्य श्री रमाकांत गोस्वामी, मथुरा से प्राप्त हुई। ब्रजभूमि की 84 कोस परिक्रमा के दौरान श्रद्धालु एक-दूसरे का अभिवादन "राधे-राधे" कहकर करते हैं। यह केवल एक संबोधन नहीं, बल्कि प्रेम, भाईचारे, समानता और भक्ति का प्रतीक है। उसी दिव्य भावना को समाज सेवा से जोड़ते हुए संस्था का नाम राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद रखा गया।

संस्था की स्थापना 7 अगस्त 2024 को प्रभु श्रीराम की पावन जन्मभूमि श्री अयोध्या धाम में भागवत महाज्ञान कथा के पावन अवसर पर की गई। वहीं यह संकल्प लिया गया कि सेवा किसी अवसर विशेष तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रतिदिन समाज के बीच पहुंचकर जरूरतमंदों की सहायता की जाएगी। अयोध्या से शुरू हुआ यह सेवा संकल्प आज हैदराबाद में मानवता की एक नई पहचान बन चुका है।

हैदराबाद आने के बाद सबसे पहले सिकंदराबाद स्थित गांधी अस्पताल के सामने नियमित नाश्ता सेवा प्रारंभ की गई। समय के साथ सेवा का विस्तार होता गया और वर्तमान में संस्था नामपल्ली पब्लिक गार्डन, पिलर नंबर 1265-ए, बेगम बाजार स्थित भू देवी माता मंदिर के पास गौशाला के सामने तथा केबीआर पार्क स्थित इंडो अमेरिकन कैंसर चिकित्सालय के समीप प्रतिदिन नियमित सेवा कार्य संचालित कर रही है। इन तीनों सेवा केंद्रों पर प्रतिदिन लगभग एक हजार से अधिक जरूरतमंद लोग नाश्ता एवं अन्नदान का लाभ प्राप्त करते हैं।

आज राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद केवल अन्नदान तक सीमित नहीं है। संस्था समय-समय पर निःशुल्क चिकित्सा सहायता, स्वास्थ्य शिविर, दवाइयों का वितरण, रक्तदान, गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण, धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में सहयोग तथा प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाती है। प्रयागराज महाकुंभ सहित अनेक धार्मिक आयोजनों में भी संस्था ने सेवाभाव का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।

राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां सेवा को कभी प्रदर्शन का माध्यम नहीं बनाया गया। संस्था का प्रत्येक सेवाभावी सदस्य यह मानकर कार्य करता है कि हर जरूरतमंद में भगवान का स्वरूप विद्यमान है। भोजन केवल वितरित नहीं किया जाता, बल्कि सम्मान और आत्मीयता के साथ परोसा जाता है। यही कारण है कि आज 200 से अधिक सेवाभावी सदस्य इस अभियान से जुड़े हुए हैं और प्रतिदिन अपने समय, श्रम और संसाधनों का योगदान देकर मानव सेवा की इस ज्योति को निरंतर प्रज्वलित रखे हुए हैं।

सतीश गुप्ता, जगत नारायण अग्रवाल, राम प्रकाश अग्रवाल और महेश अग्रवाल का मानना है कि यदि समाज का प्रत्येक सक्षम व्यक्ति सप्ताह में एक दिन भी किसी जरूरतमंद की सेवा का संकल्प ले ले, तो देश में कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं रहेगा। सेवा केवल आर्थिक सहयोग का नाम नहीं, बल्कि संवेदनशील हृदय, समर्पित सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचायक है।

राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद आज केवल एक संस्था नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण, सहयोग और मानवता का जनआंदोलन बन चुका है। यह संगठन समाज को यह संदेश दे रहा है कि जीवन की वास्तविक सफलता केवल धन अर्जित करने में नहीं, बल्कि उस धन, समय और सामर्थ्य का उपयोग समाज के कल्याण के लिए करने में है। जब किसी भूखे की थाली भरती है, किसी असहाय को सहारा मिलता है और किसी निराश व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लौटती है, तभी सच्चे अर्थों में ईश्वर की आराधना पूर्ण होती है।