"सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और मानवता ही सबसे बड़ी पूजा।"
जब सेवा ही जीवन का उद्देश्य बन जाए और परोपकार ही जीवन की साधना बन जाए, तब ऐसे व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणा बन जाते हैं। राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद की को-फाउंडर श्रीमती बबीता अग्रवाल ऐसी ही प्रेरणादायी समाजसेविका हैं, जिन्होंने अपने जीवन को धर्म, सेवा और मानवीय मूल्यों के लिए समर्पित कर दिया है।
श्रीमती बबीता अग्रवाल का जन्म अक्टूबर 1971 में एक धार्मिक एवं संस्कारी परिवार में हुआ। आपके पिता श्री ओमप्रकाश सिंघानिया तथा माता श्रीमती कौशल्या सिंघानिया हैं। आपका मूल निवास राजस्थान के झुंझुनू जिले के सिंघाना का है। आपने एस.एस.सी. तक शिक्षा प्राप्त की और बचपन से ही धार्मिक संस्कार, सेवा भावना तथा सामाजिक उत्तरदायित्व को अपने जीवन का आधार बनाया।
आपके परिवार में भाई अजय सिंघानिया एवं हरीश सिंघानिया हैं। बहनों में सुनीता अग्रवाल, सरिता अग्रवाल, गीता अग्रवाल, पूनम अग्रवाल तथा बबीता अग्रवाल हैं। परिवार से मिले संस्कारों ने आपको समाज के प्रति संवेदनशील और सेवा के प्रति समर्पित बनाया।
आपका विवाह 8 मार्च 1988 को समाजसेवी महेश अग्रवाल के साथ संपन्न हुआ। आपके दो सुपुत्र अभिमन्यु अग्रवाल एवं पुष्पक अग्रवाल हैं। इसके अतिरिक्त आपने एक बालिका को अपनी पुत्री के समान प्रेम, स्नेह और सम्मान देकर यह संदेश दिया है कि परिवार केवल रक्त संबंधों से नहीं, बल्कि प्रेम, अपनत्व और संस्कारों से बनता है।
राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद की को-फाउंडर के रूप में श्रीमती बबीता अग्रवाल संगठन की स्थापना से ही सेवा कार्यों की मजबूत आधारशिला रही हैं। वे अपने पति महेश अग्रवाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अन्नदान, गौसेवा, धार्मिक आयोजनों, जरूरतमंदों की सहायता और जनकल्याण के अनेक कार्यों में सक्रिय रहती हैं। उनका मानना है कि सच्ची पूजा मंदिरों तक सीमित नहीं, बल्कि पीड़ित और जरूरतमंद लोगों की सेवा में निहित है।
श्रीमती बबीता अग्रवाल की विशेष रुचि गौसेवा, संत सेवा, धार्मिक अनुष्ठानों, भक्ति और सामाजिक सेवा में है। वे प्रत्येक सेवा कार्य को ईश्वर की आराधना मानकर पूर्ण निष्ठा, विनम्रता और समर्पण के साथ निभाती हैं। उनके नेतृत्व और सहयोग से राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद आज मानव सेवा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी संस्था के रूप में निरंतर आगे बढ़ रहा है।
उनका जीवन सादगी, संवेदनशीलता, करुणा और सेवा का अद्भुत संगम है। वे बिना किसी प्रसिद्धि की इच्छा के समाज के वंचित, जरूरतमंद और असहाय लोगों तक सहायता पहुँचाने का कार्य निरंतर करती रहती हैं। उनका व्यक्तित्व समाज की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा है कि परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ सामाजिक दायित्वों का भी सफलतापूर्वक निर्वहन किया जा सकता है।
श्रीमती बबीता अग्रवाल का जीवन संदेश है कि "सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और मानवता ही सबसे बड़ी पूजा।" उनका समर्पण, निस्वार्थ सेवा और धार्मिक आस्था आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद की सेवा यात्रा में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।
"सेवा, संस्कार और समर्पण से ही जीवन सार्थक बनता है।"
श्रीमती बबीता अग्रवाल का जीवन समाज की प्रत्येक महिला और प्रत्येक परिवार के लिए प्रेरणा है। उनका निस्वार्थ समर्पण आने वाली पीढ़ियों को सेवा, संस्कार, करुणा और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा।