“सेवा की कोई उम्र नहीं होती, सच्चे संस्कारों से निकली सेवा जीवनभर चलती है।”
राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद के लिए यह अत्यंत गौरव और सौभाग्य की बात है कि आजादी के मात्र तीन माह बाद जन्मे श्री महेश कुमार आज भी उसी उमंग, उत्साह और ऊर्जा के साथ नियमित रूप से राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद के सेवा एवं अन्नदान कार्यों में अपनी सक्रिय सहभागिता निभा रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका सेवा के प्रति उत्साह युवाओं के लिए प्रेरणादायी है।
श्री महेश कुमार का जन्म 6 नवंबर 1947 को हुआ। उनके पिता श्री घनश्याम दास एवं माता श्रीमती पार्वती बाई थीं। उनका मूल स्थान महेंद्रगढ़ है। परिवार से मिले संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व को सरलता, सहजता, मिलनसारिता और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना से समृद्ध किया।
श्री महेश कुमार का वैवाहिक जीवन श्रीमती निर्मला बाई के साथ रहा। परिवार में उन्होंने प्रेम, संस्कार और आपसी सहयोग को हमेशा विशेष महत्व दिया। उनके परिवार में सुशील कुमार, सुषमा अग्रवाल एवं मनीष कुमार उनकी संतान हैं।
श्री महेश कुमार ने अपने जीवन में केवल स्वयं सेवा को अपनाया ही नहीं, बल्कि अपने भाइयों और बच्चों को भी सेवा, सहयोग और मानवता के संस्कार दिए। यही कारण है कि उनके परिवार में भी समाज के प्रति संवेदनशीलता और जरूरतमंदों की सहायता करने की भावना को विशेष स्थान मिला है।
उनके लिए परिवार केवल आपसी संबंधों का आधार नहीं, बल्कि अच्छे संस्कारों और मानवीय मूल्यों को आगे बढ़ाने का माध्यम भी है। परिवार में सेवा और सहयोग की भावना को विकसित करना उनके जीवन की महत्वपूर्ण विशेषता रही है।
श्री महेश कुमार ने उच्च शिक्षा के रूप में बी.कॉम एवं बी.फार्मेसी की शिक्षा प्राप्त की। शिक्षा के बाद उन्होंने व्यवसाय को अपने कार्यक्षेत्र के रूप में अपनाया और मेहनत, लगन तथा ईमानदारी के साथ अपने व्यावसायिक जीवन को आगे बढ़ाया।
व्यवसाय के साथ-साथ उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी पूरी निष्ठा से निभाया और अपने परिवार को मजबूत संस्कारों के साथ आगे बढ़ाया।
श्री महेश कुमार की सबसे बड़ी पहचान उनका हंसमुख, सहज और मिलनसार व्यक्तित्व है। वे हर व्यक्ति से आत्मीयता के साथ मिलते हैं और सेवा कार्यों में पूरे उत्साह से भाग लेते हैं।
बाबा जयराम दास जी की अनुपम कृपा-दृष्टि को अपने जीवन का आशीर्वाद मानते हुए श्री महेश कुमार निरंतर सेवा कार्यों में जुटे हुए हैं। राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद के नियमित अन्नदान एवं सेवा कार्यों में उनकी उपस्थिति स्वयं में प्रेरणा का विषय है।
उनके लिए सेवा केवल भोजन वितरण या सामाजिक गतिविधि नहीं, बल्कि मानवता के प्रति अपना दायित्व निभाने का माध्यम है। जरूरतमंदों के बीच पहुंचकर सेवा करना और समाज के लिए अपना समय देना उन्हें आत्मिक संतोष प्रदान करता है।
राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद के नियमित अन्नदान एवं सेवा कार्यों में उनकी सक्रिय सहभागिता सेवा के प्रति उनके निरंतर समर्पण को दर्शाती है।
राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद से श्री महेश कुमार का जुड़ाव सेवा, संस्कार और मानवता की भावना का सुंदर उदाहरण है। वे ग्रुप की नियमित सेवा एवं अन्नदान गतिविधियों में पूरे उत्साह के साथ अपनी सहभागिता निभाते हैं।
उनकी नियमित उपस्थिति और सेवा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण ग्रुप के अन्य सदस्यों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। वे सेवा को जीवन का एक महत्वपूर्ण दायित्व मानकर निरंतर योगदान देते हैं।
श्री महेश कुमार का जीवन यह संदेश देता है कि सेवा के लिए उम्र नहीं, भावना और समर्पण जरूरी है। जीवन के इस पड़ाव पर भी जिस उत्साह के साथ वे नियमित सेवा कार्यों में उपस्थित रहते हैं, वह निश्चित रूप से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी उदाहरण है।
उनका जीवन परिवार से मिले संस्कार, शिक्षा, कर्म और सेवा भावना का सुंदर संगम है। उन्होंने अपने आचरण से यह सिद्ध किया है कि यदि सेवा का संस्कार दिल में हो तो व्यक्ति जीवन के हर पड़ाव पर समाज के लिए उपयोगी बन सकता है।
श्री महेश कुमार ने अपने जीवन में सेवा की भावना को केवल स्वयं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि अपने परिवार और आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया। उनके संस्कारों का प्रभाव उनके परिवार के सदस्यों में भी सामाजिक संवेदनशीलता और सहयोग की भावना के रूप में दिखाई देता है।
राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद के लिए वे केवल एक सेवा साथी नहीं, बल्कि सेवा और संस्कारों की वह प्रेरणादायी कड़ी हैं, जो स्वयं सेवा करते हुए आने वाली पीढ़ियों को भी मानवता की राह दिखा रही है।
श्री महेश कुमार का जीवन इस बात का सुंदर उदाहरण है कि सच्चे संस्कार और सेवा भावना व्यक्ति को जीवन के हर चरण में समाज के लिए उपयोगी बनाती है। उनका हंसमुख स्वभाव, सरलता, मिलनसारिता और सेवा के प्रति अटूट उत्साह उन्हें एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व बनाता है।
राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद की सेवा यात्रा में उनका योगदान निश्चित रूप से गौरवपूर्ण है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को यह प्रेरणा देता है कि सेवा करने के लिए किसी विशेष उम्र या परिस्थिति की आवश्यकता नहीं होती—जरूरत केवल सच्ची भावना, संस्कार और समर्पण की होती है।
“सेवा की कोई उम्र नहीं होती, सच्चे संस्कारों से निकली सेवा जीवनभर चलती है।”