“सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है—परिवार से मिले संस्कारों को समाज की सेवा में लगाना ही जीवन की सच्ची सार्थकता है।”
राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद के सेवा परिवार से जुड़ी मोनू अग्रवाल एक सरल, सहज, मिलनसार और समाजसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व हैं। पारिवारिक संस्कारों, व्यवसायिक जिम्मेदारियों और सामाजिक सेवा के बीच संतुलन बनाकर चलना उनके जीवन की विशेष पहचान है।
मोनू अग्रवाल का जन्म 25 नवंबर 1986 को हैदराबाद में हुआ। उनके पिता श्री शिव शंकर गोयल एवं माता श्रीमती अनीता गोयल हैं। परिवार में स्वर्गीय भाई ऋषभ गोयल तथा बहन स्वाति गोयल और निगम गोयल हैं।
उनके पिता का पैतृक गांव हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के अटेली खंड में स्थित ताजपुर गांव है। परिवार से मिले संस्कारों ने मोनू अग्रवाल के व्यक्तित्व में बचपन से ही मेहनत, अनुशासन, ईमानदारी, जिम्मेदारी और सेवा भावना की मजबूत नींव रखी।
मोनू अग्रवाल ने सीएफए (चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट) तक की शिक्षा प्राप्त की है। वित्त एवं निवेश के क्षेत्र में सीएफए एक प्रतिष्ठित व्यावसायिक योग्यता है, जो वित्तीय विश्लेषण, निवेश प्रबंधन और वित्तीय निर्णयों की गहरी समझ से जुड़ी है।
शिक्षा के क्षेत्र में अपनी क्षमता सिद्ध करने के साथ-साथ उन्होंने जीवन में यह भी साबित किया कि ज्ञान की वास्तविक उपयोगिता तभी है, जब उसका उपयोग जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभाने और समाज के हित में किया जाए।
29 जून 2010 को मोनू अग्रवाल का विवाह हैदराबाद के शिमलावाले परिवार के श्री पंकज अग्रवाल के साथ हुआ। उनके दो पुत्र हैं—वंश अग्रवाल एवं सुयश अग्रवाल।
विवाह के बाद मोनू अग्रवाल ने परिवार की जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से संभालते हुए अपने पति के साथ व्यवसाय और सामाजिक दायित्वों में भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया। परिवार, व्यवसाय और समाजसेवा के बीच संतुलन स्थापित करना उनके व्यक्तित्व की विशेष पहचान है।
मोनू अग्रवाल के जीवन में सेवा भावना उनके पारिवारिक संस्कारों की निरंतर यात्रा है। उनके पिता श्री शिव शंकर गोयल और माता श्रीमती अनीता गोयल ने परिवार को परिश्रम, सादगी, सहयोग, ईमानदारी और दूसरों के लिए कुछ करने की भावना के संस्कार दिए।
इन्हीं संस्कारों को मोनू अग्रवाल ने अपने जीवन में आगे बढ़ाया। उनके लिए सेवा केवल किसी कार्यक्रम में भाग लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने प्रत्येक दायित्व को ईमानदारी और जिम्मेदारी से निभाना भी सेवा का ही एक रूप है।
विवाह के बाद उन्हें ससुराल पक्ष से भी समाजसेवा की प्रेरणा और संस्कार प्राप्त हुए। राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद के संयोजक श्री जगत नारायण अग्रवाल एवं श्रीमती राजकुमारी अग्रवाल के स्नेह, मार्गदर्शन और सामाजिक कार्यों से जुड़ाव ने उनके सेवा भाव को और मजबूत किया।
अपने पति श्री पंकज अग्रवाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।
मोनू अग्रवाल पंकज टेक्सटाइल एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड में निरंतर अपनी सेवाएं दे रही हैं। संस्था के लेखा-जोखा और वित्तीय जिम्मेदारियों को वह पूरी निष्ठा, ईमानदारी, सावधानी और कर्तव्यपरायणता के साथ संभालती हैं।
लेखा-जोखा का कार्य अत्यंत जिम्मेदारी वाला कार्य होता है। इसमें पारदर्शिता, अनुशासन और विश्वास सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। मोनू अग्रवाल अपनी कार्यशैली में इन्हीं मूल्यों को प्राथमिकता देती हैं।
उनकी वित्तीय समझ और सीएफए तक की शिक्षा उनके व्यावसायिक दायित्वों को और अधिक प्रभावी ढंग से निभाने में सहायक बनती है।
मोनू अग्रवाल की कार्यकुशलता और ईमानदारी का प्रभाव राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद की सेवा गतिविधियों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। ग्रुप के कार्यों से संबंधित लेखा-जोखा एवं वित्तीय जिम्मेदारियों को वह पूरी पारदर्शिता और निष्ठा के साथ संभालती हैं।
राधे-राधे ग्रुप की सेवा गतिविधियों को नियमित और व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने में पर्दे के पीछे रहकर व्यवस्था संभालने वाले सदस्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मोनू अग्रवाल इसी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाने वाली सदस्य हैं।
मोनू अग्रवाल के लिए सेवा केवल किसी कार्यक्रम में उपस्थित होने या सहयोग करने तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार सेवा वह है, जो बिना किसी अपेक्षा के की जाए, जिसमें जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभाया जाए और समाज के हित को अपने स्वार्थ से ऊपर रखा जाए।
वह परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए व्यवसाय में अपनी भूमिका निभाती हैं और साथ ही समाजसेवा के दायित्व में भी अपना योगदान देती हैं।
राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद के साथ मोनू अग्रवाल का जुड़ाव उनके पारिवारिक संस्कारों और सामाजिक सोच का सुंदर उदाहरण है। अन्नदान, मानव सेवा और अन्य सामाजिक सेवा कार्यों में अपनी सहभागिता निभाते हुए वे सेवा की इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं।
किसी जरूरतमंद को भोजन कराना, उसके चेहरे पर मुस्कान लाना और कठिन समय में उसके साथ खड़ा होना ही सच्ची मानवता है—इसी भावना को वे अपने कार्यों के माध्यम से आगे बढ़ा रही हैं।
मोनू अग्रवाल का जीवन युवाओं को यह संदेश देता है कि करियर और समाजसेवा एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। व्यक्ति अपने व्यवसाय में सफल होते हुए भी समाज के लिए समय निकाल सकता है और परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए भी सेवा कार्यों में योगदान दिया जा सकता है।
उनका मानना है कि यदि युवा अपने व्यस्त जीवन से थोड़ा समय निकालकर सेवा कार्यों से जुड़ें, तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
मोनू अग्रवाल का जीवन महिलाओं के लिए भी प्रेरणादायी है। परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए शिक्षा प्राप्त करना, व्यवसाय में सक्रिय रहना और समाजसेवा से जुड़ना यह दर्शाता है कि मजबूत इच्छाशक्ति के साथ अनेक जिम्मेदारियों को संतुलित किया जा सकता है।
उनका जीवन यह संदेश देता है कि शिक्षा आत्मविश्वास देती है, निर्णय लेने की क्षमता देती है और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करती है।
मोनू अग्रवाल की सेवा यात्रा का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि समाजसेवा की भावना अगली पीढ़ी तक भी पहुंचनी चाहिए। बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने परिवार में देखते हैं।
यदि बच्चे अपने माता-पिता को जरूरतमंदों की मदद करते हुए, अन्नदान करते हुए, समाज के लिए समय निकालते हुए और ईमानदारी से जिम्मेदारियां निभाते हुए देखते हैं, तो उनके मन में भी सेवा का संस्कार स्वतः विकसित होता है।
मोनू अग्रवाल को अपने माता-पिता से मिले संस्कार और ससुराल पक्ष से मिली सामाजिक प्रेरणा एक ऐसी विरासत है, जिसे उन्होंने अपने जीवन में आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। यह विरासत धन-दौलत की नहीं, बल्कि संस्कारों, जिम्मेदारी, सेवा और मानवता की विरासत है।
राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद के माध्यम से वह इस विरासत को समाज के व्यापक हित से जोड़ रही हैं। उनके कार्यों से यह संदेश मिलता है कि समाजसेवा के लिए बड़े पद की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि बड़ा हृदय और जिम्मेदारी निभाने का संकल्प चाहिए।
मोनू अग्रवाल का जीवन एक सुंदर संदेश देता है—संस्कार जब कर्म में उतरते हैं, तो सेवा का रूप लेते हैं और सेवा जब निरंतरता के साथ की जाती है, तो समाज में परिवर्तन की शक्ति बन जाती है।
एक ओर माता-पिता से मिले संस्कार, दूसरी ओर ससुराल पक्ष से मिली समाजसेवा की प्रेरणा; एक ओर परिवार की जिम्मेदारियां, दूसरी ओर व्यवसाय की जिम्मेदारी और इनके साथ समाज के प्रति समर्पण—इन सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना ही मोनू अग्रवाल के व्यक्तित्व की विशेष पहचान है।
“सफल बनिए, लेकिन संवेदनशील भी बनिए। कमाइए, लेकिन समाज के लिए भी कुछ बचाइए। अपने परिवार को आगे बढ़ाइए, लेकिन समाज को भी अपना परिवार समझिए।”