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SHRI SANTOSH TATIYA

Guide of Service – Radhe-Radhe Group Hyderabad


संतोष टाटिया

“किसी का भला कर सको तो करिए, परंतु बुराई या बुरा करने का प्रयास मत करिए।”

श्री संतोष टाटिया का जीवन सामाजिक सरोकार, धार्मिक आस्था, सेवा भावना और संस्कारों के प्रति समर्पण का परिचायक है। वर्ष 1963 में बिहार के निर्मली में जन्मे श्री संतोष टाटिया के पिता श्री प्रभु दयाल टाटिया एवं माता श्रीमती सावित्री देवी टाटिया थीं।

उनका पारिवारिक मूल राजस्थान के सरदारशहर, जो वर्तमान में चूरू जिले में स्थित है, से जुड़ा हुआ है। परिवार से मिले संस्कारों और सामाजिक मूल्यों ने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया और आगे चलकर यही संस्कार उनके जीवन की दिशा बने।

Personal Background

श्री संतोष टाटिया ने इंटरमीडिएट तक शिक्षा प्राप्त की। वर्तमान में हैदराबाद को अपनी कर्मभूमि बनाकर वे पारिवारिक एवं व्यावसायिक दायित्वों के साथ-साथ सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भी सक्रिय सहभागिता निभा रहे हैं।

Family Life

6 दिसंबर 1989 को उनका विवाह श्रीमती संगीता टाटिया के साथ हुआ। उनके भाई आनंद टाटिया एवं सुशील टाटिया हैं। परिवार में गौरव टाटिया एवं कीर्ति अग्रवाल सहित संतानें हैं।

पारिवारिक जीवन में प्रेम, सहयोग और संस्कारों को विशेष महत्व देते हुए वे अपने सामाजिक एवं धार्मिक दायित्वों का भी निरंतर निर्वहन करते रहे हैं।

Social Service

श्री संतोष टाटिया की पहचान केवल एक व्यवसायी के रूप में नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने वाले सेवाभावी व्यक्ति के रूप में भी है। उनका मानना है कि समाज ने हमें बहुत कुछ दिया है, इसलिए समाज के लिए अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।

उनकी सोच में सेवा का अर्थ केवल किसी एक अवसर पर सहायता करना नहीं, बल्कि निरंतर समाज के साथ खड़े रहना है। वे सामाजिक एकता, आपसी सहयोग और भाईचारे को समाज की मजबूती का आधार मानते हैं।

Social & Religious Organizations

श्री संतोष टाटिया अनेक सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। इनमें श्री श्याम मंदिर सेवा समिति, काचीगुड़ा, अग्रवाल समाज तेलंगाना, श्री सालासर हनुमान मंदिर सेवा समिति, जगतगिरी गुप्ता बाबा गंगाराम सेवा समिति, हैदराबाद, बिहार अग्रवाल संघ ट्रस्ट, हैदराबाद तथा लायंस क्लब सहित विभिन्न संस्थाएं शामिल हैं।

इन संस्थाओं के माध्यम से वे धार्मिक आयोजनों, सामाजिक गतिविधियों, जरूरतमंदों की सहायता तथा समाजहित के विभिन्न कार्यों में अपनी भूमिका निभाते रहे हैं।

Values & Sanskars

श्री संतोष टाटिया का मानना है कि धन और प्रतिष्ठा जीवन की उपलब्धियां हो सकती हैं, लेकिन मनुष्य की वास्तविक पहचान उसके व्यवहार और संस्कारों से होती है। दूसरों के सुख-दुख में सहभागी बनना, जरूरतमंद की सहायता करना और समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने का प्रयास करना उनके जीवन के महत्वपूर्ण सिद्धांत हैं।

उनका जीवन-वाक्य भी इसी भावना को व्यक्त करता है— “किसी का भला कर सको तो करिए, परंतु बुराई या बुरा करने का प्रयास मत करिए।”

Philosophy of Life

उनका मानना है कि यदि हम किसी व्यक्ति के लिए अच्छा नहीं कर सकते तो कम से कम उसके लिए बुरा सोचने या बुरा करने से बचना चाहिए। समाज में प्रेम, विश्वास और सद्भाव बढ़ाने की दिशा में प्रत्येक व्यक्ति का छोटा-सा प्रयास भी बड़ा परिवर्तन ला सकता है।

वे सामाजिक एकता, आपसी सहयोग और भाईचारे को समाज की मजबूती का आधार मानते हैं। धार्मिक संस्थाओं से जुड़ाव के साथ वे सामाजिक जिम्मेदारियों को भी समान महत्व देते हैं।

Service Journey

हैदराबाद जैसे महानगर में रहते हुए श्री संतोष टाटिया ने सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं के साथ सक्रिय रूप से जुड़कर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है। विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से समाज के लोगों से जुड़ना, धार्मिक आस्थाओं को मजबूत करना और सामाजिक कार्यों में सहयोग देना उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

उनका व्यक्तित्व यह संदेश देता है कि सेवा के लिए किसी बड़े पद की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि बड़ा मन और सकारात्मक सोच आवश्यक होती है। समाज में रहते हुए अपने समय, सामर्थ्य और संसाधनों का कुछ हिस्सा समाजहित में लगाना ही सच्चे अर्थों में सामाजिक जिम्मेदारी है।

Association with Radhe-Radhe Group

राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद की “सेवा के सारथी” श्रृंखला में श्री संतोष टाटिया का परिचय ऐसे व्यक्तित्व के रूप में किया जाना गौरव की बात है, जो धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों को भी महत्व देते हैं।

उनकी सेवा भावना, सहज व्यवहार, सकारात्मक सोच और संस्कार समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। राधे-राधे ग्रुप के सेवा कार्यों के माध्यम से वे समाज में सेवा, सहयोग और मानवता की भावना को मजबूत करने में अपना योगदान दे रहे हैं।

Inspiration for Society

श्री संतोष टाटिया का जीवन यह संदेश देता है कि सेवा केवल एक अवसर या कार्यक्रम तक सीमित नहीं होनी चाहिए। सेवा को जीवन के संस्कार के रूप में अपनाकर समाज के प्रति निरंतर अपनी जिम्मेदारी निभाई जा सकती है।

धार्मिक आस्था, सामाजिक जुड़ाव, सकारात्मक सोच और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता उनके व्यक्तित्व की महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं। यही गुण उन्हें समाज के लिए एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व बनाते हैं।

Conclusion

सेवा उनके लिए केवल एक कार्य नहीं, बल्कि जीवन का संस्कार है; और समाज के प्रति समर्पण उनके व्यक्तित्व की सच्ची पहचान है। अपने पारिवारिक संस्कारों, धार्मिक आस्था और सामाजिक जिम्मेदारियों को साथ लेकर श्री संतोष टाटिया निरंतर समाजहित में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

उनका जीवन हमें प्रेरणा देता है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार समाज के लिए योगदान दे और दूसरों के प्रति सकारात्मक सोच रखे, तो समाज में प्रेम, सद्भाव, सहयोग और मानवता की भावना को और मजबूत बनाया जा सकता है।

Life Message

“किसी का भला कर सको तो करिए, परंतु बुराई या बुरा करने का प्रयास मत करिए।”