"जहाँ सेवा होती है, वहाँ ईश्वर का निवास होता है।"
इसी भावना को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाकर समाज सेवा के पथ पर निरंतर अग्रसर रहने वाली श्रीमती राजकुमारी अग्रवाल राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद की को-फाउंडर हैं। वे उन महिलाओं में शामिल हैं जिन्होंने परिवार के दायित्वों का आदर्श रूप से निर्वहन करते हुए समाज और मानवता की सेवा को भी अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाया। उनकी सादगी, विनम्रता, धार्मिक आस्था, करुणा और निस्वार्थ सेवा भावना उन्हें समाज में विशिष्ट स्थान प्रदान करती है।
श्रीमती राजकुमारी अग्रवाल का जन्म 15 नवंबर 1966 को राजस्थान के अलवर जिले के खोर बसई ग्राम में एक प्रतिष्ठित एवं धार्मिक अग्रवाल परिवार में हुआ। उनके पिता श्री हरिकिशन अग्रवाल तथा माता श्रीमती ज्ञाना बाई अग्रवाल धार्मिक प्रवृत्ति, उच्च संस्कार और सेवा भावना के प्रतीक थे। बचपन से ही उन्हें धर्म, संस्कृति, परिवार और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का वातावरण मिला, जिसने उनके व्यक्तित्व को संवेदनशील, संस्कारित और सेवाभावी बनाया। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गृह क्षेत्र में प्राप्त की।
उनके परिवार में चार भाई—श्री नानूराम अग्रवाल, श्री अश्वनी कुमार अग्रवाल, श्री राजकुमार अग्रवाल एवं श्री सुंदरलाल अग्रवाल तथा बहनों में श्रीमती गमा देवी अग्रवाल, श्रीमती शोभा देवी अग्रवाल, श्रीमती संतोष देवी अग्रवाल और श्रीमती राजकुमारी अग्रवाल हैं। परिवार में मिले संस्कारों ने उन्हें सदैव धर्म, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
19 नवंबर 1984 को उनका विवाह हैदराबाद के प्रतिष्ठित अग्रवाल परिवार में श्री जगत नारायण अग्रवाल के साथ संपन्न हुआ। विवाह के बाद उन्होंने अपने परिवार को प्रेम, संस्कार और अनुशासन के साथ आगे बढ़ाया। उनके परिवार में एक पुत्र श्री पंकज अग्रवाल तथा दो पुत्रियाँ वर्षा अग्रवाल और पूनम अग्रवाल हैं। उन्होंने अपने बच्चों को भी सेवा, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व का पाठ पढ़ाया।
श्रीमती राजकुमारी अग्रवाल का जीवन केवल पारिवारिक दायित्वों तक सीमित नहीं रहा। उनके मन में सदैव धर्म और सेवा के प्रति विशेष अनुराग रहा है। गौ सेवा, संत सेवा, अन्नदान, धार्मिक अनुष्ठान, आध्यात्मिक आयोजनों में सहयोग, जरूरतमंदों की सहायता तथा सामाजिक सेवा के प्रत्येक कार्य में वे सक्रिय रहती हैं। उनका मानना है कि किसी भूखे को भोजन कराना, पीड़ित के आँसू पोंछना और जरूरतमंद की सहायता करना ही सच्ची ईश्वर भक्ति है।
राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद की स्थापना से लेकर आज तक वे संगठन की प्रत्येक सेवा गतिविधि की प्रेरक शक्ति रही हैं। ग्रुप द्वारा संचालित नियमित अन्नदान, गौ सेवा, धार्मिक आयोजन, रक्तदान एवं स्वास्थ्य सेवा शिविर, जरूरतमंदों की सहायता तथा विभिन्न सामाजिक सेवा कार्यक्रमों में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहता है। वे प्रत्येक सेवा कार्य को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ईश्वर की आराधना मानकर पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ निभाती हैं।
उनके पति श्री जगत नारायण अग्रवाल समाज सेवा के क्षेत्र में जिस समर्पण और निष्ठा के साथ कार्य कर रहे हैं, उसमें श्रीमती राजकुमारी अग्रवाल का मौन लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण सहयोग सदैव रहा है। उन्होंने हर परिस्थिति में एक सच्ची जीवनसंगिनी के रूप में उनका साथ दिया और सेवा कार्यों में कंधे से कंधा मिलाकर संगठन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका यह सहयोग ही राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद को आज सेवा के क्षेत्र में एक सम्मानित पहचान दिलाने में सहायक बना है।
वे मानती हैं कि समाज की वास्तविक उन्नति तभी संभव है जब महिलाएँ परिवार के साथ-साथ सामाजिक और धार्मिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाएँ। उनका जीवन इस विचार का सशक्त उदाहरण है कि मातृशक्ति जब सेवा का संकल्प लेती है, तब समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होता है।
अपनी सरलता, मधुर व्यवहार, धार्मिक आस्था और सेवाभाव के कारण वे समाज के प्रत्येक वर्ग में सम्मानित हैं। वे अनेक महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं और यह संदेश देती हैं कि निस्वार्थ सेवा, विनम्रता और संस्कार ही जीवन की सबसे बड़ी पूँजी हैं।
आज श्रीमती राजकुमारी अग्रवाल राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद की को-फाउंडर के रूप में निरंतर समाज, धर्म और मानवता की सेवा में समर्पित हैं। उनका संपूर्ण जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि "सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं और परोपकार से बड़ा कोई पुण्य नहीं।" उनका व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और समाज सेवा के क्षेत्र में सदैव स्मरणीय रहेगा।
"सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं और परोपकार से बड़ा कोई पुण्य नहीं।"