“संघर्ष, परिश्रम और सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ जीवन को सार्थक बनाना ही सच्ची सफलता है।”
श्री हरीश तोलाराम हिंदूजा का जीवन संघर्ष, परिश्रम, पारिवारिक संस्कारों और सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रेरणादायी उदाहरण है। बचपन से ही कर्मठ और जिम्मेदार स्वभाव के हरीश हिंदूजा ने कम उम्र में ही जीवन की जिम्मेदारियों को समझते हुए अपने कर्मक्षेत्र में कदम रखा।
श्री हरीश तोलाराम हिंदूजा का जन्म 27 मई 1955 को हुआ। उनके पिता श्री तोलाराम हिंदूजा एवं माता श्रीमती भागी बाई थीं। उन्होंने 10वीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की।
बचपन से ही कर्मठ और जिम्मेदार स्वभाव के हरीश हिंदूजा ने बहुत कम उम्र में जीवन की जिम्मेदारियों को समझते हुए अपने कर्मक्षेत्र में कदम रखा। उनके जीवन में परिश्रम और जिम्मेदारी हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं।
उनका इतिहास भारत-पाकिस्तान विभाजन की कठिन परिस्थितियों से जुड़ा हुआ है। विभाजन से पूर्व उनके पूर्वज शिकारपुर राजस्थान के जैसलमेर जिले के निकट निवास करते थे। विभाजन के समय परिस्थितियां बदलीं और यह क्षेत्र पाकिस्तान में चला गया।
उस दौर की कठिनाइयों और विस्थापन को उनके परिवार ने निकट से देखा। अपने परिवार की सुरक्षा और बेहतर भविष्य के लिए उनके पूर्वज भारत आए और हैदराबाद को अपनी कर्मभूमि बनाया। संघर्ष के उस दौर ने परिवार में भारत के प्रति प्रेम, सम्मान और अपनत्व की भावना को और मजबूत किया।
हरीश हिंदूजा का पालन-पोषण एक बड़े एवं संस्कारवान परिवार में हुआ। उनके पांच भाई— अर्जुन लाल, अमर लाल, प्रताप लाल, डॉ. विनोद कुमार एवं हरीश हिंदूजा तथा चार बहनें— कौशल्या देवी, शकुंतला देवी, देवी (बेबी) एवं मंजू देवी हैं।
पारिवारिक एकता, सहयोग और संस्कारों का प्रभाव उनके व्यक्तित्व में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। परिवार से मिले मूल्यों ने उनके जीवन में जिम्मेदारी और आपसी सहयोग की भावना को मजबूत किया।
मात्र 14 वर्ष की आयु में उन्होंने व्यवसाय के क्षेत्र में कदम रखा। कपड़े की दुकान से शुरू हुई उनकी व्यवसायिक यात्रा निरंतर परिश्रम और लगन के साथ आगे बढ़ती गई।
समय के साथ यह कार्य विकसित होकर आज दरियानुमल तोलाराम हिंदूजा ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। उनकी यह यात्रा युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा है कि मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ छोटे स्तर से शुरू किया गया कार्य भी सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।
13 मार्च 1978 को हैदराबाद में उनका विवाह श्रीमती शमी हिंदूजा के साथ हुआ। उनके पारिवारिक जीवन में प्रेम, विश्वास और संस्कारों का विशेष महत्व रहा है।
उनके परिवार में सीमा हिंदूजा, नितिन हिंदूजा एवं अमित हिंदूजा के रूप में संतान हुई। परिवार के साथ जीवन के मूल्यों और संस्कारों को आगे बढ़ाना उनके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
व्यवसाय के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों के प्रति भी हरीश हिंदूजा की विशेष रुचि रही है। राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद से उनका जुड़ाव समाजसेवा और सामाजिक गतिविधियों में सहभागिता के उद्देश्य से हुआ।
ग्रुप द्वारा संचालित सेवा कार्यों, अन्नदान तथा जरूरतमंदों के सहयोग जैसे कार्यों से जुड़कर वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने में योगदान दे रहे हैं।
राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद के लिए ऐसे सदस्यों का साथ विशेष महत्व रखता है, जिनके जीवन में संघर्ष का अनुभव, परिवार के संस्कार, व्यवसाय में ईमानदार परिश्रम और समाज के प्रति संवेदनशीलता हो। हरीश हिंदूजा का जीवन इन्हीं मूल्यों का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है।
सेवा कार्यों, अन्नदान और जरूरतमंदों के सहयोग के माध्यम से वे संगठन की सेवा भावना को अपना समर्थन देते हुए सामाजिक एकजुटता और मानवता के प्रयासों में सहभागी बने हुए हैं।
हरीश हिंदूजा का जीवन संघर्ष, परिश्रम और दृढ़ संकल्प की शक्ति को दर्शाता है। विस्थापन की कठिन परिस्थितियों से लेकर हैदराबाद में व्यवसाय के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने तक की उनकी यात्रा अपने आप में प्रेरणादायी है।
उनका जीवन यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियां इंसान को रोक नहीं सकतीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और निरंतर परिश्रम के साथ वही परिस्थितियां सफलता की नींव बन सकती हैं।
मात्र 14 वर्ष की आयु में व्यवसाय की शुरुआत से लेकर एक प्रतिष्ठित व्यवसायिक पहचान बनाने तक की उनकी यात्रा नई पीढ़ी को मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के महत्व की प्रेरणा देती है।
उनका जीवन यह सिखाता है कि व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों से घबराने के बजाय उन्हें अवसर में बदलने का प्रयास करना चाहिए। व्यवसायिक सफलता के साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी जीवन की सार्थकता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
“कठिन परिस्थितियां इंसान को रोक नहीं सकतीं। दृढ़ संकल्प, निरंतर परिश्रम और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ जीवन को सफलता और सेवा की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।”