"सेवा, संस्कार और संवेदना के माध्यम से ही समाज को मजबूत और बेहतर बनाया जा सकता है।"
श्री भगतराम गोयल राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद के सक्रिय सदस्य तथा सेवा, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना से जुड़े प्रेरक व्यक्तित्व हैं। सरलता, विनम्रता, धार्मिक आस्था और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता उनके व्यक्तित्व की विशेष पहचान है।
श्री भगतराम गोयल का जन्म 17 मार्च 1956 को हैदराबाद में हुआ। उनके पिता श्री सूरज भान जी तथा माता श्रीमती नांगी बाई जी हैं।
बचपन से ही उन्हें परिवार से सेवा, सदाचार, परोपकार एवं भारतीय संस्कृति के श्रेष्ठ संस्कार प्राप्त हुए, जिन्हें उन्होंने अपने जीवन में निरंतर आगे बढ़ाया।
10 दिसंबर 1980 को उनका विवाह श्रीमती सुमन लता के साथ हुआ। उनके परिवार में पुत्र श्याम गोयल एवं अमर गोयल हैं।
वे अपने पारिवारिक जीवन के साथ सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने में भी सक्रिय रहते हैं।
श्री भगतराम गोयल का विश्वास है कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। इसी भावना के साथ वे राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद की विभिन्न सेवा गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता निभाते हैं।
उनका मानना है कि जरूरतमंद की सहायता, भूखे को भोजन और समाज के लिए अपना समय देना मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। उनका सेवाभावी व्यक्तित्व समाज के अन्य लोगों, विशेषकर नई पीढ़ी को भी सेवा और परोपकार के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
श्री भगतराम गोयल के लिए समाजसेवा केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि जीवन के मूल संस्कारों और सामाजिक उत्तरदायित्व का हिस्सा है। वे जरूरतमंदों की सहायता, मानव सेवा और समाजहित के कार्यों में अपनी सहभागिता को महत्वपूर्ण मानते हैं।
उनकी सरलता, विनम्रता और सेवा के प्रति समर्पण समाज में सहयोग, करुणा और मानवता की भावना को मजबूत करने में योगदान देता है।
राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद की सेवा यात्रा में श्री भगतराम गोयल की सहभागिता समर्पण और सामाजिक चेतना का उदाहरण है। विभिन्न सेवा गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी ग्रुप के सेवा संकल्प को निरंतर मजबूत करती है।
उनका जीवन यह संदेश देता है कि सेवा, संस्कार और संवेदना के माध्यम से ही समाज को मजबूत और बेहतर बनाया जा सकता है।
श्री भगतराम गोयल का सेवाभावी व्यक्तित्व समाज के अन्य सदस्यों और विशेषकर नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका विश्वास है कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार समाज के लिए योगदान देकर मानवता और सामाजिक एकता को मजबूत कर सकता है।
"जरूरतमंद की सहायता, भूखे को भोजन और समाज के लिए अपना समय देना मानवता की सबसे बड़ी सेवा है।"