“सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है—परिवार से मिले संस्कारों को समाज की सेवा में लगाना ही जीवन की सच्ची सार्थकता है।”
राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद के सेवा परिवार से जुड़े मनीष अग्रवाल एक सरल, सहज, मिलनसार और समाजसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व हैं। पारिवारिक संस्कारों, व्यवसायिक जिम्मेदारियों और सामाजिक सेवा के बीच संतुलन बनाकर चलना उनके जीवन की विशेष पहचान है।
मनीष अग्रवाल का जन्म 26 फरवरी 1975 को हुआ। उनके पिता श्री कैलाश अग्रवाल तथा माता श्रीमती शुशीला देवी हैं। तीन भाइयों में मनीष अग्रवाल सबसे बड़े हैं। उनके छोटे भाई अमित अग्रवाल और सुमित अग्रवाल हैं।
परिवार में सबसे बड़े होने के कारण उन्होंने बचपन से ही जिम्मेदारी, अनुशासन और परिवार को साथ लेकर चलने के संस्कार प्राप्त किए। उनका मूल निवास चिंदालिया गांव, जिला महेंद्रगढ़, हरियाणा है। आगे चलकर हैदराबाद उनकी कर्मभूमि बनी।
मनीष अग्रवाल ने अपनी शिक्षा इंटरमीडिएट तक पूरी की। शिक्षा के साथ उन्हें परिवार से मिले संस्कारों और जीवन मूल्यों ने उनके व्यक्तित्व को मजबूत आधार दिया।
उनका मानना है कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होती, बल्कि परिवार और समाज से मिलने वाले अच्छे संस्कार भी व्यक्ति के जीवन की महत्वपूर्ण शिक्षा होते हैं।
मनीष अग्रवाल का विवाह वर्ष 1997 में हैदराबाद में श्रीमती सीमा अग्रवाल के साथ हुआ। सीमा अग्रवाल उनके जीवन की महत्वपूर्ण सहयोगी हैं और परिवार को संस्कार, स्नेह तथा आपसी सहयोग के साथ आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
विवाह के बाद मनीष अग्रवाल और सीमा अग्रवाल ने मिलकर परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर प्रयास किया।
मनीष अग्रवाल और सीमा अग्रवाल के दो बच्चे हैं— पीयूष अग्रवाल एवं प्रणय अग्रवाल। वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार, परिवार के प्रति सम्मान और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना देने को महत्वपूर्ण मानते हैं।
उनका विश्वास है कि आने वाली पीढ़ी को यदि परिवार से सेवा, सहयोग और मानवता के संस्कार मिलें, तो वह समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
व्यवसाय के क्षेत्र में मनीष अग्रवाल मेडिकल लाइन से जुड़े हुए हैं। वे प्रियंका फार्मा, इंद्रबाग, हैदराबाद के माध्यम से अपने व्यवसाय का संचालन कर रहे हैं।
व्यवसाय में सक्रिय रहते हुए भी मनीष अग्रवाल सामाजिक जिम्मेदारियों को कभी पीछे नहीं रखते। उनके लिए व्यवसाय जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन समाज और जरूरतमंदों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी उतना ही आवश्यक है।
मनीष अग्रवाल डोमालगुड़ा अग्रवाल समाज की शाखा से भी जुड़े हुए हैं। समाज के साथ उनका जुड़ाव सामाजिक एकता, आपसी सहयोग और समाजहित की भावना को मजबूत करता है।
वे मानते हैं कि समाज की प्रगति तभी संभव है जब समाज के लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनें और जरूरत के समय एक-दूसरे का साथ दें।
मनीष अग्रवाल के जीवन में सेवा भावना की सबसे बड़ी प्रेरणा उनके पिता श्री कैलाश अग्रवाल हैं। पिता से मिले संस्कारों ने उन्हें यह विश्वास दिया कि मानव सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है।
इसी प्रेरणा के चलते मनीष अग्रवाल राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद के सेवा कार्यों से जुड़े। ग्रुप द्वारा किए जा रहे अन्नदान, मानव सेवा और अन्य सामाजिक सेवा कार्यों में अपनी सहभागिता निभाते हुए वे सेवा की इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद के साथ मनीष अग्रवाल का जुड़ाव उनके पारिवारिक संस्कारों और सामाजिक सोच का सुंदर उदाहरण है। अन्नदान और मानव सेवा जैसे कार्यों के माध्यम से जरूरतमंदों तक सहयोग पहुंचाने की भावना उन्हें विशेष रूप से प्रभावित करती है।
वे मानते हैं कि समाज में ऐसे सेवा कार्यों की निरंतरता आवश्यक है, क्योंकि किसी जरूरतमंद को भोजन कराना, उसके चेहरे पर मुस्कान लाना और कठिन समय में उसके साथ खड़ा होना ही सच्ची मानवता है।
मनीष अग्रवाल का मानना है कि आज की युवा पीढ़ी के पास समाज के लिए कुछ अच्छा करने के अनेक अवसर हैं। यदि युवा अपने व्यस्त जीवन से थोड़ा समय निकालकर सेवा कार्यों से जुड़ें, तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
उनका संदेश है कि व्यक्ति चाहे किसी भी व्यवसाय या क्षेत्र में हो, उसे अपने जीवन में सेवा के लिए स्थान अवश्य रखना चाहिए। परिवार से मिले संस्कारों को आगे बढ़ाना और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना हर व्यक्ति का कर्तव्य है।
मनीष अग्रवाल का व्यक्तित्व परिवार, व्यवसाय और समाजसेवा के संतुलन का उदाहरण है। पिता से मिले सेवा संस्कार, पत्नी सीमा अग्रवाल का सहयोग, बच्चों के प्रति जिम्मेदारी, व्यवसाय में सक्रियता और समाज के प्रति समर्पण उनके जीवन की महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं।
राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद के सदस्य के रूप में मनीष अग्रवाल सेवा की उस विचारधारा को आगे बढ़ा रहे हैं, जिसमें मानवता, सहयोग, अन्नदान और समाजहित को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।
“धन, व्यवसाय और सफलता तभी सार्थक हैं, जब उनका कुछ हिस्सा समाज और जरूरतमंदों के काम आए।”