"सेवा, संस्कार और समाज के प्रति समर्पण—यही जीवन को सार्थक और समाज को मजबूत बनाने का मार्ग है।"
शिव भगवान अग्रवाल राधे-राधे ग्रुप, हैदराबाद के सम्मानित एवं सक्रिय सदस्य हैं। वे सामाजिक, धार्मिक एवं सेवा कार्यों के प्रति पूर्णतः समर्पित व्यक्तित्व हैं। व्यवसाय के साथ-साथ वे विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं तथा संगठनात्मक जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करते हुए समाज में सहयोग, धार्मिक आस्था, सेवा भावना और सामाजिक एकता को निरंतर सुदृढ़ कर रहे हैं।
शिव भगवान अग्रवाल का मूल संबंध बांय, तारानगर, जिला चूरू (राजस्थान) से है। उन्होंने इंटरमीडिएट (12वीं) तक शिक्षा प्राप्त की। उनके पिताश्री इन्द्रचन्द अग्रवाल तथा माताश्री तारामणि देवी हैं। बचपन से ही उन्हें परिवार से सेवा, संस्कार, अनुशासन एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की प्रेरणा प्राप्त हुई, जो आज भी उनके व्यक्तित्व की प्रमुख पहचान है।
उनका विवाह 23 अप्रैल 1993 को श्रीमती सरोज देवी के साथ सम्पन्न हुआ। उनके परिवार में नरेन्द्र अग्रवाल, राहुल अग्रवाल एवं अमन अग्रवाल हैं। परिवार से प्राप्त संस्कारों एवं जीवन मूल्यों को वे अपने जीवन में सर्वोच्च स्थान देते हैं तथा सामाजिक एवं धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
शिव भगवान अग्रवाल व्यवसाय के क्षेत्र में सक्रिय हैं और शिव शक्ति टी कॉरपोरेशन से जुड़े हुए हैं। मेहनत, लगन, व्यवहार-कुशलता एवं विश्वास को वे अपने व्यावसायिक जीवन की सफलता का आधार मानते हैं। व्यवसायिक दायित्वों के साथ-साथ सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों के लिए समय निकालना उनके व्यक्तित्व की विशेष पहचान है।
शिव भगवान अग्रवाल विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं में महत्वपूर्ण दायित्व निभा रहे हैं—
इन दायित्वों के माध्यम से वे धार्मिक आयोजनों, सामाजिक कार्यक्रमों, संगठनात्मक गतिविधियों एवं जनसेवा से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। विशेष रूप से प्रचार-प्रसार एवं संयोजन की जिम्मेदारियों के माध्यम से वे अधिक से अधिक लोगों को सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों से जोड़ने का निरंतर प्रयास करते हैं।
राधे-राधे ग्रुप, हैदराबाद के सक्रिय सदस्य के रूप में शिव भगवान अग्रवाल नियमित अन्नदान, मानव सेवा एवं अन्य समाजसेवा गतिविधियों में अपनी महत्वपूर्ण सहभागिता निभा रहे हैं। उनके लिए सेवा केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानवता एवं परमार्थ के प्रति समर्पण का माध्यम है।
उनका विश्वास है कि समाज की वास्तविक शक्ति आपसी सहयोग और सेवा भावना में निहित है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद लोगों की सहायता करे, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन निश्चित रूप से संभव है।
शिव भगवान अग्रवाल के व्यक्तित्व में व्यवसायिक अनुभव, धार्मिक आस्था, संगठनात्मक क्षमता तथा समाजसेवा की भावना का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। विभिन्न संस्थाओं के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहकर वे समाज में सेवा, संस्कार और सहयोग की भावना को मजबूत करने का सतत प्रयास कर रहे हैं।
उनकी जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि व्यवसाय के साथ समाज और धर्म के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना भी जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनकी सरलता, समर्पण और सक्रिय सहभागिता उन्हें समाज में विशिष्ट पहचान प्रदान करती है।
"सेवा, संस्कार और समाज के प्रति समर्पण—यही जीवन को सार्थक और समाज को मजबूत बनाने का मार्ग है।"