"सच्ची भक्ति केवल पूजा-अर्चना में नहीं, बल्कि मानव सेवा में निहित है।"
सुशील गुप्ता राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद के सम्मानित, समर्पित एवं सक्रिय सदस्य हैं। वे सेवा, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व के ऐसे प्रेरक व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने सदैव समाजहित को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया है। उनकी सरलता, विनम्रता, धार्मिक आस्था तथा सेवाभाव उन्हें समाज में विशिष्ट सम्मान दिलाते हैं।
उनका जन्म 12 मार्च 1975 को हैदराबाद में हुआ। उनके पिताश्री श्री महेश गुप्ता तथा माताश्री श्रीमती निर्मला देवी गुप्ता हैं। उन्होंने बी.कॉम. तक शिक्षा प्राप्त की। बचपन से ही उन्हें परिवार से सेवा, सदाचार, परोपकार एवं भारतीय संस्कृति के उच्च संस्कार प्राप्त हुए, जो आज भी उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पहचान हैं।
21 फरवरी 1996 को उनका विवाह श्रीमती शीतल अग्रवाल के साथ संपन्न हुआ। उनके परिवार में पुत्र कौशिक अग्रवाल तथा पुत्री विनीता अग्रवाल हैं। परिवार के साथ वे सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने में निरंतर सक्रिय रहते हैं।
सुशील गुप्ता हैदराबाद की प्रतिष्ठित धार्मिक संस्था जीण माता के लाडले से जुड़े हुए हैं, जहाँ वे सेवा एवं धार्मिक गतिविधियों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अतिरिक्त वे अग्रवाल समाज श्याम मंदिर शाखा के सक्रिय सदस्य हैं तथा समाज के विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों में सदैव उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं।
राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद के नियमित सदस्य के रूप में वे अन्न सेवा, मानव सेवा, गौ सेवा तथा जरूरतमंदों की सहायता जैसे विभिन्न सेवा कार्यों में पूरे समर्पण और निस्वार्थ भाव से योगदान देते हैं। उनका विश्वास है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-अर्चना में नहीं, बल्कि पीड़ित एवं जरूरतमंद मानव की सेवा में निहित है। यही विचार उन्हें निरंतर सेवा-पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
अपने सहज व्यवहार, सकारात्मक सोच, संगठन के प्रति समर्पण और सेवा की भावना के कारण सुशील गुप्ता राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद परिवार के एक महत्वपूर्ण सदस्य हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी सामर्थ्य के अनुसार समाज के लिए कुछ समय और सहयोग समर्पित करे, तो एक संवेदनशील, संस्कारित और सशक्त समाज का निर्माण संभव है।
राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद को ऐसे सेवाभावी, संस्कारवान एवं समर्पित सदस्य पर गर्व है। उनकी सेवा यात्रा समाज के लिए प्रेरणा है और भविष्य में भी वे मानवता, सेवा एवं परमार्थ के पथ पर इसी प्रकार निरंतर अग्रसर रहेंगे।
"सच्ची भक्ति केवल पूजा-अर्चना में नहीं, बल्कि पीड़ित एवं जरूरतमंद मानव की सेवा में निहित है।"