
"जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहीं सेवा सफल होती है; और जहाँ सेवा सफल होती है, वहीं समाज और राष्ट्र का उज्ज्वल भविष्य निर्मित होता है।"
जब भी किसी महान सेवा अभियान की सफलता की चर्चा होती है, तब केवल मंच पर दिखाई देने वाले व्यक्तित्वों का ही नहीं, बल्कि उन मातृशक्तियों का भी सम्मान किया जाना चाहिए, जिनके त्याग, समर्पण, प्रेरणा और सहयोग से वह अभियान निरंतर आगे बढ़ता है। राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद की सेवा यात्रा भी इसी सत्य का जीवंत उदाहरण है।
राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद की स्थापना में फाउंडर सतीश कुमार गुप्ता, जगत नारायण अग्रवाल, राम प्रकाश अग्रवाल एवं महेश अग्रवाल की जितनी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, उतनी ही प्रेरणादायी और गौरवपूर्ण भूमिका उनकी अर्धांगिनियों श्रीमती आशा अग्रवाल, श्रीमती राजकुमारी अग्रवाल, श्रीमती सुनीता अग्रवाल एवं श्रीमती बबीता अग्रवाल की भी रही है। इन मातृशक्तियों ने केवल अपने परिवार का दायित्व ही नहीं निभाया, बल्कि सेवा को अपना धर्म मानते हुए संगठन के प्रत्येक संकल्प को अपना संकल्प बनाया।
भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति, संस्कार, ममता और त्याग का स्वरूप माना गया है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब भी किसी परिवार, समाज या संगठन ने ऊँचाइयों को प्राप्त किया है, उसके पीछे नारी शक्ति का मौन लेकिन अमूल्य योगदान अवश्य रहा है। राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद की स्थापना और उसके निरंतर विस्तार में भी यही सत्य स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
जब फाउंडर समाज सेवा के संकल्प को लेकर आगे बढ़े, तब उनकी अर्धांगिनियों ने बिना किसी अपेक्षा के हर कदम पर उनका साथ दिया। परिवार की जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करते हुए उन्होंने अपने जीवनसाथियों को समाज सेवा के लिए सदैव प्रेरित किया। उनके विश्वास, धैर्य और सहयोग ने ही इस सेवा यात्रा को निरंतर गति प्रदान की।
अन्नदान, गौसेवा, धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम, जरूरतमंदों की सहायता, मानव सेवा तथा विभिन्न जनकल्याणकारी अभियानों में इन मातृशक्तियों का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सहयोग संगठन की सबसे बड़ी शक्ति बना है। अनेक अवसरों पर वे स्वयं सेवा कार्यों में सक्रिय रहती हैं और अनेक अवसरों पर परिवार के प्रत्येक सदस्य को सेवा के संस्कार देकर संगठन को नई ऊर्जा प्रदान करती हैं।
किसी भी संगठन की सफलता केवल उसके पदाधिकारियों के परिश्रम से नहीं होती, बल्कि उनके परिवारों के विश्वास, त्याग और सहयोग से होती है। यदि परिवार साथ न हो तो बड़े से बड़ा संकल्प भी अधूरा रह जाता है। राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद का निरंतर बढ़ता हुआ सेवा अभियान इस बात का प्रमाण है कि जब पूरा परिवार सेवा को अपना संस्कार बना ले, तब समाज में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आता है।
आज राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद मानव सेवा, अन्नदान, सामाजिक समरसता और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। इस उपलब्धि के पीछे फाउंडर के अथक परिश्रम के साथ-साथ उनकी अर्धांगिनियों का त्याग, धैर्य, समर्पण और प्रेरणा भी समान रूप से सम्मान की अधिकारी है। इन मातृशक्तियों ने कभी स्वयं को आगे रखकर सम्मान नहीं चाहा, बल्कि संगठन की सफलता को ही अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि माना।
राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद परिवार आदरपूर्वक स्वीकार करता है कि यदि फाउंडर इस संगठन के मजबूत स्तंभ हैं, तो उनकी अर्धांगिनियाँ उसकी अटूट नींव हैं। जिस प्रकार भवन की मजबूती उसकी नींव पर निर्भर करती है, उसी प्रकार संगठन की स्थिरता और निरंतर प्रगति उसके परिवारों के सहयोग पर आधारित होती है।
इन मातृशक्तियों का समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उनका जीवन यह संदेश देता है कि सेवा केवल किसी एक व्यक्ति का कार्य नहीं, बल्कि पूरे परिवार का संस्कार होती है। जब परिवार सेवा का संकल्प लेता है, तब समाज में मानवता, करुणा और परोपकार की नई ज्योति प्रज्वलित होती है।
राधे-राधे ग्रुप हैदराबाद अपनी सभी मातृशक्तियों को नमन करता है, जिनके त्याग, सहयोग, समर्पण और सेवा भावना ने इस संगठन को समाज सेवा की एक सशक्त पहचान दिलाने में अमूल्य योगदान दिया है।